युवा सन्यासी स्वामी राम शंकर की कहानी
 

उत्तर प्रदेश देवरिया जो बाबा राघव  दास एवं महात्मा देवरहवा बाबा की कर्म भूमि तथा तपोभूमि है |

 उसी भूमि पर जिला मुख्यालय देवरिया से १२ दूरी पर स्थित टेकुआ चौराहा के निकट ग्राम खजुरी भट्ट में स्वर्गीय श्री राम सेवा मिश्रा जी निवास करते थे l जिनको तीन पुत्र क्रमशः आद्याप्रसाद , विद्याधर तथा नंदकिशोर मिश्र प्राप्त हुये lनंदकिशोर मिश्रा जी कर्मकांड के आचार्य है जो गोरखपुर शहर में रहते है l आपके दो पुत्र रामप्रकाश तथा उदय प्रकाश व एक पुत्री विजयलक्ष्मी जी है l रामप्रकाश जी का जन्म १ नवम्बर १९८७ को खजुरी भट्ट में हुआ, आपके पिता जी आपको पढ़ाने के लिए गाव से आपको ले कर गोरखपुर चले आये ,यही आप महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज से १२ तक की पढ़ाई संपन्न किये आगे जब आप पंडित दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से बी काम द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहे थे तभी १ नवम्बर २००८ को भोर में छुप कर अयोध्या आ गये जहा ११ नवम्बर को लोमश ऋषि आश्रम के महंथ स्वामी शिवचरण दास महाराज से सन्यास की दीक्षा प्राप्त कर भगवन की साधना में लीन हो गए l हलाकि दोस्तों के कहने पर आपने बी .काम . की पढ़ाई बिना नागा किये २००९ में पूरी कर लिये lअब रामप्रकाश से स्वामी राम शंकर दास हो गये , कुछ समय बीतने के बाद पूज्य स्वामी जी के ह्रदय में विचार प्रगट हुआ की सनातन धर्म का ठीक प्रकार से अध्यन करना चाहिए जिसके फल स्वरुप स्वामी जी अयोद्या छोड़ कर गुजरात चले गये वहा आर्य समाज के गुरुकुल वानप्रस्थ साधक ग्राम आश्रम रोजर में रह कर योग दर्शन की पढ़ाई व साधना किये l कुछ समय हरयाणा के जींद में स्थापित गुरुकुल कालवा में रह कर संस्कृत व्याकरण की पढ़ाई किये इसी जगह प्रख्यात योग गुरु स्वामी राम देव जी भी अपना बल कॉल बिता चुके है l सिप्तम्बर २००९ को हिमाचल के कांगड़ा जिला में स्थित चिन्मय मिशन के द्वारा संचालित गुरुकुल '' संदीपनी हिमालय'' में प्रवेश प्राप्त कर गुरुकुल आचार्य संत शिरोमणि पूज्य पाद स्वामी गंगेशानन्द सरस्वती जी के निर्देशन में तीन वर्ष रह कर वेदांत उपनिषद्, भगवद्गीता ,रामायण आदि सनातन धर्म के शास्त्रो का अध्ययन संपन्न कर १५ अगस्त २०१२ को आप शास्त्र में स्नातक की योग्यता प्रात किये lअभी भी आपके भीतर की योग विषयक पिपासा शांत नहीं हो पायी थी जिसके कारण ही योग को समझने के लिये योग के प्रसिद्ध केंद्र बिहार स्कूल ऑफ़ योग मुंगेर ( रिखिआ पीठ ) में फरवरी २०१३ से मई २००१३ तक साधना किये ल आगे अपनी पिपाशा शांत करने हेतु विश्व प्रसिद्ध कैवल्य धाम योग विद्यालय लोनावला पुणे ,महाराष्ट्र में रह कर जुलाई २०१३ से अप्रैल २०१४ तक डिप्लोमा इन योग के पाठ्यक्रम में रह कर योग से सम्बंधित पतंजलि योग सूत्र , हठप्रदीपिका , घेरण्ड संहिता आदि प्रमुख शास्त्रो का अध्यन कर स्वयं में शांति का अनभव करने के फलस्वरूप पूज्य स्वामी जी वर्मन समय में प्रभु श्री राम के चरित्र को रोचकता के साथ संगीतमय प्रस्तुति कर समाज के नागरिको को सत्यनिष्ठ , सदाचारी बनाने की प्रेरणा प्रदान कर रहे है ऐसे युवा सन्यासी को सच्चे मन से मै अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित करता हू , जो इस कलियुग में मानवगत स्वार्थी स्वभाव का परित्याग कर समाज को अपना जीवन समर्पित कर रहे है

 

.Profile

 



From early on in life, Swamiji had a desire for ultimate peace and an


 inclination to lead an existence undependent on material values. The same

 

accompanied by a strong desire to serve the community, especially the youth

 

of today and lead them towards Dharmic values and garner an unwavering

 

Indian culture within them, led him to take up the life of a Swami.

 



Spiritual Learning

 



• Initiated in the Swami order at the age of 21 by Swami Shivcharan Das

 

Maharaj, at Lomash Rishi Ashram.

 

• Studied Vedanta for three years in Himachal Pradesh, from the Chinmaya

 

Mission’s Gurukul, Sandeepani Himalaya, in Dharamshala.

 

• Underwent a basic study of Yoga, for 4 months at the Bihar school of Yoga

 

• Currently studying for the Diploma in Yoga Education, at Kaivalyadhama, Lonavla.

 

 


Spiritual Experience

 



Ram Katha



Has been performing musical renditions of Ram Katha for sadhaks all

 

over the country, to aid in their understanding of Dharma, Shastra and

 

ultimately bring about their spiritual upliftment.

 



Yoga Abhyasa

 



Have been conducting sessions of Asana, Pranayama, Dhyana and Mantra

 

chanting along with the spiritual discourses.

 



Kirtan

 



Have been organizing and performing Kirtan for devotees on religious

 

occasions as well as by invitation on auspicious occasions.